संकाय/प्रशासन

नाम : डॉ. पी.के. दास

कार्य : प्रोफ़ेसर

ई-मेल : pkdas@iift.edu

अर्हताएं

भारतीय कृषि सांख्यिकी अनुसंधान संस्‍थान, नई दिल्‍ली से "नानलिनियर स्‍टेटिस्टिकल माडल्‍स फॉर स्‍टडइंग एकरेज, प्राडक्‍शन और प्राडक्टिविटी ऑफ व्‍हीट इन इण्डिया" पर पीएच.डी. (1996), एमएससी (1991) (कृषि सांख्यिकी), आईएएसआरआई, नई दिल्‍ली  

 एनईटी (अर्हता प्राप्‍त करने का वर्ष):1995

विशेषज्ञता क्षेत्र

व्‍यवसाय सांख्यिकी, व्‍यवसाय अनुसंधान पद्धतियां, उन्‍नत अनुसंधान पद्धतियां, विपणन अनुसंधान।

कार्य अनुभव

इस समय संस्‍थान में एसोसिएट सांख्यिकी प्रोफेसर के रूप में सेवारत हैं। जिम्‍मेदारियों में शिक्षण, अनुसंधान और परामर्श सम्मिलित हैं ।

 i)    अनुसंधान

**जल विज्ञान और इंजीनियरी प्रभाग, केन्‍द्रीय मृदा और जल संरक्षण, अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्‍थान (आईसएआर) देहरादून, उत्‍तराखण्‍ड, मार्च 2003 से 21 अगस्‍त 2007 तक वरिष्‍ठ वैज्ञानिक ।

**भूमि, जल, पर्यावरण और इंजीनियरी अनुसंधान कार्यक्रम, आईसीएआर अनुसंधान कम्‍प्‍लेक्‍स फॉर ईस्‍टर्न रीजन, पटना, बिहार, अप्रैल 2001 से मार्च 2003 तक वैज्ञानिक (वरि. वेतनमान) के रूप में ।

**जल प्रबंधन अनुसंधान निदेशालय (आईसीएआर), बिहार मार्च 2000 से मार्च 2001 तक वैज्ञानिक (वरि. वेतनमान) के रूप में ।

**जल प्रबंधन अनुसंधान निदेशक (आईसीएआर), पटना, बिहार सितम्‍बर 1996 से मार्च 2000 तक वैज्ञानिक के रूप में ।

**राष्‍ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी (आईसीएआर), हैदराबाद, आन्‍ध्र प्रदेश, मार्च 1996 से अगस्‍त 1996 तक वैज्ञानिक के रूप में ।

 ii)   शिक्षण

**वर्तमान में, संस्‍थान में भिन्‍न-भिन्‍न कार्यक्रमों के लिए व्‍यवसाय सांख्यिकी, व्‍यवसाय अनुसंधान पद्धतियां, उन्‍नत अनुसंधान पद्धति और विपणन अनुसंधान पढ़ा रहे हैं ।

**केन्‍द्रीय मृदा और जल संरक्षण अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्‍थान (आईसीएआर), देहरादून, उत्‍तराखण्‍ड में ।

 iii)  कॉरपोरेट क्षेत्र

**आर आर फाइनेन्शियल कनसल्‍टेन्‍ट्स लि., इन्‍द्रा प्रकाश बिल्डिंग, बारहखंभा रोड, नई दिल्‍ली-110001, अनुसंधान विश्‍लेषक के रूप में तथा प्रधान अनुसंधान प्रभाग, अप्रैल 1995 से मार्च 1996 ।

 अनुसंधान परियोजनाओं का विवरण

 क. वर्तमान में कार्यरत

**विश्‍व व्‍यापार में "सार्क" देशों के बीच कपड़ा और वस्‍त्र मूल्‍य श्रृंखला को सक्रिय बनाने की सम्‍भावनाएं (एसोसिएट) ।

**भारतीय कृषि उत्‍पादों के लिए निर्यात सम्‍भावनाएं-मुद्दों का एक आकलन (एसोसिएट)।

**भौगोलिक निहितार्थ ।

 ख. विगत कार्य

**संरक्षण उपायों की योजना तैयार करने के लिए वर्षा और बहाव डेटा का स्‍टोकास्टिक विश्‍लेषण (प्रधान अन्‍वेषक) ।

 आईसीएआर द्वारा वित्‍तपोषित

अनुसंधान उपलब्धियां : उत्‍तराखण्‍ड के भिन्‍न-भिन्‍न स्‍टेशनों के साप्‍ताहिक वर्षा डेटा का उल्‍लेख करने के लिए उपयुक्‍त सम्‍भाव्‍यता माडल का विनिर्धारण। न्‍यूनतम आश्‍वस्‍त वर्षा का परिकलन किया गया तथा दून घाटी में वर्षा भिन्‍नता के साथ मक्‍का फसल उत्‍पादकता के जोखिम का आकलन करने के लिए प्रयुक्‍त। सर्वोत्‍तम-उपयुक्‍त सम्‍भाव्‍यता माडल का उपयोग करते हुए एक दिन की अधिकतम वर्षा का अनुमान लगाया तथा दून घाटी में संरक्षण योजना तैयार करने के लिए भिन्‍न-भिन्‍न प्रतिफल अवधि में अनुकरण तकनीक ।

**एन-निरन्‍तर सम्‍भाव्‍यता वर्षा का अनुमान लगाना, सम्‍भावित वाष्‍पीकरण व देश में भिन्‍न-भिन्‍न स्‍थानों पर फसल उत्‍पादकता को प्राभावित करने वाले अन्‍य मौसम प्राचल (प्रधान अन्‍वेषक)।

 आईसीएआर द्वारा वित्‍त पोषित

अनुसंधान उपलब्धियां : भारत में भिन्‍न-भिन्‍न स्‍टेशनों के साप्‍ताहिक वर्षा डेटा का उल्‍लेख करने के लिए सर्वोत्‍तम-उपयुक्‍त सम्‍भाव्‍यता माडल का विकास किया। वर्षा भिन्‍नता के कारण चावल उत्‍पादन के जोखिम को न्‍यूनतम करने के लिए न्‍यूनतम आश्‍वस्‍त वर्षा और जल सन्‍तुलन का अनुमान लगाया ।

**एकीक़त राष्‍ट्रीय कृषि संसाधन सूचना प्रणाली (सहकारी केन्‍द्र प्रधान अन्‍वेषक) ।

 विश्‍व बैंक द्वारा वित्‍त पोषित

अनुसंधान उपलब्धियां : जल संसाधनों के विभिन्‍न पहलुओं का डेटाबेस विकसित किया गया। जीआईएस का उपयोग करते हुए जल संसाधन नक्‍शों का विकास किया गया ।

 **बिहार और पूर्वी उत्‍तर प्रदेश में उत्‍पादकता बढ़ाने के लिए भूमि और जल संसाधनों का एकीक़त प्रबंधन। आईसीएआरआरसीईआर पटना, आईएसीआर रोथमस्‍टेड, यू.के. और आईडब्‍ल्‍युएमआई, श्रीलंका के बीच सहयोगात्‍मक परियोजना (एसोसिएट) ।

 डीएफआईडी, यू.के. द्वारा वित्‍तपोषित

अनुसंधान उपलब्धिया : किसानों के साथ परस्‍पर-सक्रिय सर्वेक्षण आयोजित किया, स्‍नोबाल प्रतिदर्श तकनीक का इस्‍तेमाल करके सामाजिक, संस्‍थागत और तकनीकी बाधाओं का पता लगाने के लिए महिलाओं सहित। वर्षा, नहर और भू-जल की स्‍थानिक और टेम्‍पोरल उपलब्‍धता तथा जल भराव की सीमा/स्रोतों का आकलन करना ।

** सुथरी फसल और मृदा प्रबंधन के जरिए आजीविकाओं में सुधार हुआ (आईसीएआर-आरसीईआर, पटना, आईसीएआर-रोथमस्‍टेड, यू.के. और आईडब्‍ल्‍युएमआई, श्रीलंका के बीच एक सहयोगात्‍मक परियोजना) (एसोसिएट)।

 डीएफआईडी, यू.के. द्वारा वित्‍तपोषित

अनुसंधान उपलब्धियां : जीडीपीएस का इस्‍तेमाल करके भूकर-मानचित्रों का क्षेत्र सत्‍यापन, लेसर सर्वेक्षण उपस्‍कर और स्‍थानिक डेटा एकत्रित करके हस्‍त धारित कम्‍प्‍यूटर। यह तय करने के लिए कि किस प्रकार पर्यावरणीय विशेषताएं और सामाजिक कारक फसल और मृदा प्रबंधन निर्णय निर्धारित करते हैं। स्‍थानिक और परिणामी डेटा एकत्र किया, उसे एकीकृत किया और व्‍याख्‍या की ।

**विभिन्‍न सिंचाई समय तालिकाओं पर गेहूँ में मृदा-जल-पौधा संबंध तथा केन्‍द्रीय बिहार की भारी टेक्‍टुरेल एलुविअल सोयल में पोषक प्रबंधन स्‍तर (एसोसिएट)।

 आईसीएआर द्वारा वित्‍तपोषित

योगदान : क्षेत्र प्रयोग आयोजित करने के लिए उपयुक्‍त डिजाइन सुझाया। एकत्रित डेटा का विश्‍लेषण करने में मदद की ।

**मध्‍य बिहार में फार्म सिंचाई का आय और रोजगार प्रभाव (एसोसिएट) ।

 आईसीएआर द्वारा वित्‍तपोषित

योगदान : सर्वेक्षण डिजाइन विकसित करने में मदद की।


प्रकाशन

क. शीर्ष समीक्षित पत्रिका में

        1            एक सब-ह्युमिड जलवायु में संरक्षण आयोजना के लिए चरम वर्षा श्रृंखला का सामाव्‍यता वितरण (कृषि में अनुप्रयुक्‍त इंजीनियरी 2008, वी.एन. शारदा और पी.आर. ओजस्‍वी के साथ) ।

 

        2            विभेदक विश्‍व स्‍थान पद्धति, लेसर सर्वेक्षण पद्धति का अनुप्रयोग और एक वाटरशेड में प्रीसीजन कृषि में हस्‍तधारित कम्‍प्‍यूटर (इन्‍टरनेशनल जर्नल ट्रापिकल एग्रीकल्‍चर, खण्‍ड 25, अंक 3, 2007)

        3            गम्‍मा सम्‍भाव्‍यता वितरण का इस्‍तेमाल करके साप्‍ताहिक वर्षा माडलिंग और मध्‍य बिहार की सब-ह्युमिड (शुष्‍क) जलवायु में फसल आयोजना के लिए मार्कोव श्रृंखला (इण्डियन जर्नल ऑफ एग्रीकल्‍चर साइन्सिज, खण्‍ड 76, जून 2006, एन.सुभाष, ए.के. सिक्‍का, वी.एन. शारदा और एन.के. शर्मा के साथ) ।

        4            भारत की एक सब-ह्युमिड जलवायु में फसल आयोजना के लिए साप्‍ताहिक वर्षा डेटा की माडलिंग (एग्रीकल्‍चरल वाटर मेनेजमेंट 76 (2):120-138, 2005, वी.एन. शारदा के साथ) ।

        5            सब-ह्युमिड (शुष्‍क) जलवायु के लिए चावल-गेहूँ पद्धति के अन्‍तर्गत फसल आयोजना के लिए वर्षा विशेषताएं और सम्‍भाव्‍यता विश्‍लेषण (इण्डियन जर्नल ऑफ सोयल कन्‍जर्वेशन 32(2):124-128, 2004, एन. सुभाष के साथ) ।

        6            कृषि अनुसंधान में स्‍थानिक और परिणामी डेटा के संग्रह के लिए डिजिटल टेक्‍नोलाजी का इस्‍तेमाल करते हुए त्‍वरित सर्वेक्षण तकनीक (जर्नल ऑफ दि सीएसआई 33(2):1-5-2003) ।

        7            राज्‍य-वार गेहूँ उत्‍पादकता का उल्‍लेख करने के लिए विकास माडल (इण्डियन जर्नल ऑफ एग्रीकल्‍चरल रीसर्च, 34(3):179-81, 2000, प्रजनेषु के साथ) ।

        8            हरित क्रान्ति पश्‍चात राज्‍य स्‍तर पर गेहूँ उत्‍पादन की माडलिंग (इण्डियन जर्नल ऑफ एग्रीकल्‍चरल साइन्सिज, 68(1):23-6, 1998, प्रजनेषु के साथ) ।

 

ख.   पुस्‍तक/पुस्‍तक में चेप्‍टर

"वाटर प्राडक्‍शन फंक्‍शन-ए रीव्‍यु, इन वेस्‍ट रीसाइक्लिंग एंड रिसोर्स मेनेजमेंट इन दि डवलपिंग वर्ल्‍ड", स.बी.बी. जाना, आर.डी. बनर्जी, बी. गुटेरस्‍तन और जे. हीब, युनिवर्सिटी ऑफ कल्‍याणी, "इण्डिया एंड इन्‍टरनेशनल इंजीनियरी सोसायटी, स्विटजरलेण्‍ड, पृ. 543-50 (2000 एस आर सिंह के साथ) ।

 

ग.   सम्‍मेलनों/सेमिनारों में

       i)            "माडलिंग व्‍हीट प्राडक्‍शन इन इण्डिया", जर्नल ऑफ इण्डियन सोसायटी ऑफ एग्रीकल्‍चरल स्‍टेटिक्‍स, खण्‍ड XLIII (3), दिसम्‍बर 1991, पृ. 249 (सार) (प्रजनेषु के साथ) ।

     ii)            2. नानलिनिअर स्‍टेटिस्किल माडल्‍स फॉर डेस्‍क्राइबिंग स्‍टेट-वाइज व्‍हीट प्राडक्‍शन डेटा इन पोस्‍ट-ग्रीन रिवोल्‍युशन एरा, भारतीय कृषि सांख्यिकी सोसायटी के 49वें वार्षिक सम्‍मेलन में प्रस्‍तुत, जो 22 से 24 फरवरी 1996 तक लखनऊ में आयोजित हुआ था (प्रजनेषु के साथ) ।

  iii)            ना‍नलीनिअर  स्‍टेटिस्किकल माडल्‍स फॉर डेस्‍क्राइविंग ईल्‍ड-वाटर रीलेशनशिप ऑफ व्‍हीट। भारतीय कृषि सांख्यिकी सोसायटी के 53वें वार्षिक सम्‍मेलन में प्रस्‍तुत जो 2 से 4 दिसम्‍बर 1999 तक तिरूचिरापल्‍ली में आयोजित हुआ था ।

 

   iv)            "ए डेटा वेयरहाउस अप्रोच टू मेनेज लार्ज वाल्‍युम ऑफ डेटा", कम्‍प्‍यूटर इंजीनियर्स के 16वें राष्‍ट्रीय कन्‍वेंशन में प्रस्‍तुत तथा "इम्‍पेक्‍ट ऑफ इन्‍फोर्मेशन टेक्‍नोलाजी आन क्‍वालिटी ऑफ लाइफ-फ्युचर स्‍ट्रेटेजी" पर राष्‍ट्रीय सेमिनार में प्रस्‍तुत जो 15-16 दिसम्‍बर 2001 को पटना में आयोजित हुआ था (एन. सुभाष के साथ) ।

      v)            "एम्‍पीकेशन ऑफ डिफरेन्शियल ग्‍लोबल पोजीशनिंग सिस्‍टम इन लेण्‍ड एंड वाटर मेनेजमेंट", कम्‍प्‍यूटर इंजीनियरों का 16वॉं राष्‍ट्रीय कन्‍वेंशन और "जीवन कोटि पर सूचना प्रौद्योगिकी का प्रभाव-भावी कार्यनीति" 15-16 दिसम्‍बर 2001, पटना में (बी. साहा और एस.आर. सिंह के साथ) ।

   vi)            "एप्‍लीकेशन ऑफ इनफोर्मेशन टेक्‍नोलाजी इन नेचुरल रिसोर्स मेनेजमेंट फॉर सस्‍टेनेबिल एग्रीकल्‍चर", आईएसएई के 36वें वार्षिक कन्‍वेंशन और संगोष्‍ठी में प्रस्‍तुत, जो 28 से 30 जनवरी 2002 के बीच खडगपुर में आयोजित हुई थी (ए.के. सिंह और ए. उपाध्‍याय के साथ) ।

 vii)            "डीजीपीएस प्रौद्योगिकी का इस्‍तेमाल करते हुए भूकर मानचित्रण", एनआरएसए, हैदराबाद में 30-31 जनवरी, 2002 के दौरान हैदराबाद में आयोजित उपभोक्‍ता बैठक में प्रस्‍तुत (पालमेर-जोन्‍स रियार्ड, बी. साहा, एस.एस. प्रसाद, राकेश कुमार, सचिन हींगरे और मनोज सिंह के साथ) ।

viii)            "देश के सिंचाई जल संसाधनों के डेटाबेस का विकास" 24-25 अक्‍टूबर 2002 को कोलकाता में आयोजित जल विज्ञान में घटनाओं पर अंतरराष्‍ट्रीय सम्‍मेलन में प्रस्‍तुत, 24-25 अक्‍टूबर 2002 को कोलकाता में आयोजित ।

   ix)            "स्‍थानिक डेटा को शामिल करते हुए सिंचाई जल संसाधन सूचना प्रणाली"। आईएसपीआरएस, एनआरएसए, हैदराबाद में 3 से 6 दिसम्‍बर 2002 के दौरान प्रस्‍तुत (मणिभूषण, अभय कुमार, संजय तिवारी, गिरीश पंचरीया, अमलेन्‍दु शेखर के साथ) ।

      x)            "सोन कमान, बिहार की भारी मिट्टी के अन्‍तर्गत गेहूँ में एकीकृत इनपुट प्रबंधन"। बदलते विश्‍व परिदृश्‍य में कृषि पर राष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी में प्रस्‍तुत सार, 21-23 फरवरी 2002, आईएआरआई, नई दिल्‍ली में, पृ. 94-95 (एस.एस. सिंह, एल.के. प्रसाद, बी. साहा, डी. सुब्रमण्‍यम और आर.डी. सिंह के साथ) ।

 घ.    प्रशिक्षण नियम पुस्‍तक में

        1            "पी.के. दास, (2005), वाटरशेड डेटा विश्‍लेषण के संबंध में सांख्यिकीय पद्धतियां"। जल दोहन तकनीकों पर शरत स्‍कूल तथा नाली व्‍यवस्‍था लाइन ट्रीटमेंट के लिए जैव-इंजीनियरी उपाय। जुयाल, जी.पी. और वी.एन. शारदा, केन्‍द्रीय जल और मृदा संरक्षण अनुसंधान तथा प्रशिक्षण संस्‍थान, देहरादून द्वारा संकलित ।

 ड.   अन्‍य

डॉ. प्रबीर के.दास का पीएच.डी. कार्य, "एडवान्सिज इन एग्रीकल्‍चरल स्‍टेटिटिक्‍स एंड कम्‍प्‍यूटर एप्‍लीकेशन्‍स" में प्रकाशित पी.एस. राणा ओर प्रजनेषु द्वारा "फाइव डिकेड्स ऑफ रीसर्च इन बायोस्‍टेटिस्टिक्‍स एंड स्‍टेटिस्टिकल जेनेटिक्‍क्‍स : एन ओवरव्‍यु" के लिए संदर्भित किया गया है, भारतीय कृषि सांख्यिकी अनुसंधान संस्‍थान, नई दिल्‍ली, पृ. 172-78, 1999

 सांख्यिकीय परामर्श

·       "ए वीमेन्‍स अप्रोच टू एनहांस राइस-व्‍हीट प्राडक्टिविटी इन सोन कमान्‍ड" नामक टीआईएफएसी वित्‍तपोषित परियोजना के लिए सांख्यिकीय परामर्श प्रदान किया, जिसे सोन कमान क्षेत्र, पटना, बिहार में कार्यान्वित किया गया था ।

·       आईसीएआर में भिन्‍न-भिन्‍न विषयों के कार्यरत वैज्ञानिकों द्वारा आयोजित भिन्‍न-भिन्‍न परियोजनाओं के लिए डेटा के संग्रहण और विश्‍लेषण के लिए सांख्यिकीय क्रियाविधि के संबंध में इनपुट उपलब्‍ध कराए ।

·       आईआईएफटी के संकाय सदस्‍यों द्वारा आयोजित भिन्‍न-भिन्‍न परियोजनाओं के लिए सांख्यिकीय क्रियाविधि और डेटा विश्‍लेषण के संबंध में इनपुट उपलब्‍ध कराए ।

 मार्गदशन

§  इन्दिरा गांधी राष्‍ट्रीय मुक्‍त विश्‍वविद्यालय, नई दिल्‍ली के एक छात्र को "डवलपमेंट ऑफ इन्‍फोर्मेशन सिस्‍टम फॉर मेनेजमेंट ऑफ एग्रीकल्‍चरल रीसर्च प्रोजेक्‍ट" नामक प्रोजेक्‍ट कार्य के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया ।

§  अनेक एमबीए छात्रों को उनके शोध-निबंध प्रोजेक्‍ट के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया।

 अर्हता-पश्‍चात प्रशिक्षण का ब्‍योरा (आंशिक सूची)

*       आईसीएआर-रोथमस्‍टेड, यू.के., यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग, यू.के. और यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्‍ट एन्जिला, नोरविच, यू.के. में "सोयल, जिओलाजिक, हाइड्रोलोजिक मीटोओसेजोजिकल एंड अदर डेटा बेस मेनेजमेंट, जीडीपीएस का इस्‍तेमाल करते हुए भूकर मानचित्रों का क्षेत्र सत्‍यापन और अद्यतन बनाने सहित", और "कोरक्‍टराइजिंग की एनवायरनमेंटल पेरामीटर्स देट डिटरमाइन सोयल एंड क्राप मेनेजमेंट डिसिजन्‍स" पर ।

*       रिमोट सेन्सिंग टेक्‍नोलाजीज एंड इट्स एप्‍लीकेशन्‍स इनक्‍लुडिंग इमेज प्रोसेसिंग पेटर्न रिकोगनानेशन एंड जी आईएस पर राष्‍ट्रीय दूरवर्ती संवेदीकरण एजेन्‍सी, हैदराबाद में ।

*       "एडवान्‍स्‍ड साफ्टवेयर ट्रेनिंग कवरिंग आरडीबीएमएस कनसेप्‍ट्स, एमएस एक्‍सेस, नेटवर्किंग एंड ओरेकल अशेन्शियल्‍स, डी2के, जीआईएस एंड स्‍पेटिअल डेटा मेनेजमेंट कनसेप्‍ट्स" पर एनआईआईटी, नई दिल्‍ली में ।

*       "फाउन्‍डेशन कार्स फॉर एग्रीकल्‍चरल रीसर्च सर्विस (चरण और )" पर राष्‍ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी, हैदराबाद, आन्‍ध्र प्रदेश में और "फील्‍ड एक्‍सपीरिएन्‍स ट्रेनिंग" पर बीसीकेवी, कल्‍याणी, प. बंगाल में ।


व्‍यावसायिक/शैक्षणिक संबंधित

 वैज्ञानिक सोसायटियों की आजीवन सदस्‍यता

 इण्डियन सोसायटी ऑफ एग्रीकल्‍चरल स्‍टेटिस्टिक्‍स, नई दिल्‍ली

इण्डियन साइंस काग्रेस एसोसिएशन, कोलकाता

कम्‍प्‍यूटर सोसायटी ऑफ इण्डिया, मुम्‍बई

इण्डियन एसोसिएशन ऑफ सोयल एंड वाटर कन्‍जरवेशन्‍स, देहरादूर

सोसायटी ऑफ स्‍टेटिस्टिक्‍स, कम्‍प्‍यूटर एंड एप्‍लीकेशन्‍स, नई दिल्‍ली

 अवार्ड/फैलोशिप

·       राष्‍ट्रीय छात्रवृत्ति

·       विश्‍विद्यालय योग्‍यता छात्रवृत्ति

·       आईसीएआर/आईएआरआई जूनियर अनुसंधान फैलोशिप

·       आईसीएआर/आईएआरआई वरिष्‍ठ अनुसंधान फैलोशिप

·       स्‍टेटिस्टिक्‍स फॉर रूरल डवलपमेंट पर भाषण प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्‍कार प्रदान किया गया जिसका आयोजन आईएएसआरआई, नई दिल्‍ली में किया गया था ।